जय बजरंगबली 🚩
Bajrang Baan📖
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बजरंग बाण क्या है? (What is Bajrang Baan?)
बजरंग बाण, हनुमान जी (बजरंगबली) को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। इसे ‘बाण’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अपने पाठकर्ता के लिए अचूक सुरक्षा कवच का काम करता है, जैसे किसी बाण का लक्ष्य पर सटीक निशाना लगता है। यह स्तोत्र न केवल हनुमान जी की स्तुति करता है, बल्कि उनसे अपने भक्तों की रक्षा करने और उनकी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना भी करता है।
बजरंग बाण का महत्व (Importance of Bajrang Baan)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बजरंग बाण का पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
शारीरिक और मानसिक सुरक्षा: यह स्तोत्र व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी आत्माओं और अन्य प्रकार के भय से बचाता है।
संकटों से मुक्ति: माना जाता है कि जब व्यक्ति घोर संकट में हो, तो बजरंग बाण का पाठ करने से उसे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और वह संकट से मुक्त हो जाता है।
इच्छाओं की पूर्ति: सच्चे मन से बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति की उचित इच्छाएं पूरी होती हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धि: इस स्तोत्र का पाठ व्यक्ति के आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाता है।
बजरंग बाण का पाठ कैसे करें? (How to Recite Bajrang Baan?)
बजरंग बाण का पाठ करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना चाहिए:
शुद्धता: पाठ करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
एकाग्रता: शांत और एकांत स्थान पर बैठकर पूर्ण एकाग्रता के साथ पाठ करें।
आसन: कुशा आसन (एक विशेष प्रकार की घास से बना आसन) पर बैठकर पाठ करना उत्तम माना जाता है।
समय: मंगलवार और शनिवार का दिन बजरंग बाण के पाठ के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
श्रद्धा: पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करें।
बजरंग बाण के पाठ में सावधानी (Precautions while Reciting Bajrang Baan)
बजरंग बाण एक शक्तिशाली स्तोत्र है, इसलिए इसका पाठ करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:
अनुचित कार्यों के लिए प्रयोग न करें: इस स्तोत्र का प्रयोग किसी को हानि पहुंचाने या अनुचित कार्यों के लिए नहीं करना चाहिए।
उच्चारण: पाठ का सही उच्चारण करना आवश्यक है।
नियमितता: यदि आप बजरंग बाण का पाठ शुरू करते हैं, तो इसे नियमित रूप से करें।
बजरंग बाण का पाठ (Recitation of Bajrang Baan)
बजरंग बाण का पाठ विभिन्न प्रकार से किया जाता है। कुछ लोग इसे सुबह और शाम दोनों समय करते हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल संकट के समय ही करते हैं। आप अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार इसका पाठ कर सकते हैं।
बजरंग बाण का पाठ करने से क्या होता है? (What happens by reciting Bajrang Baan?)
बजरंग बाण का पाठ करने से अनेक लाभ होते हैं, जिनमें से कुछ मुख्य इस प्रकार हैं:
शारीरिक एवं मानसिक सुरक्षा: यह स्तोत्र नकारात्मक ऊर्जा, बुरी आत्माओं, तंत्र-मंत्र और अन्य प्रकार के भय से रक्षा करता है। यह एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
संकटों से मुक्ति: माना जाता है कि घोर संकट की स्थिति में बजरंग बाण का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति संकट से मुक्त हो जाता है।
इच्छाओं की पूर्ति: सच्चे मन और श्रद्धा से बजरंग बाण का पाठ करने से व्यक्ति की उचित इच्छाएं पूरी होती हैं।
आत्मविश्वास एवं साहस में वृद्धि: इस स्तोत्र का पाठ व्यक्ति के आत्मविश्वास, साहस और मनोबल को बढ़ाता है।
शत्रुओं पर विजय: कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसका नियमित पाठ शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में भी सहायक होता है (लेकिन इसका प्रयोग किसी को हानि पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं करना चाहिए)।
ग्रह दोष निवारण: कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बजरंग बाण का पाठ करने से ग्रह दोषों का निवारण भी होता है।
बजरंग बाण कब पढ़ना चाहिए? (When should Bajrang Baan be recited?)
बजरंग बाण का पाठ करने के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों और स्थितियों में इसका पाठ करना अधिक फलदायी माना जाता है:
मंगलवार और शनिवार: ये दोनों दिन हनुमान जी को समर्पित हैं, इसलिए इन दिनों में बजरंग बाण का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
संकट की स्थिति में: जब व्यक्ति किसी गंभीर संकट या परेशानी में फंसा हो, तब बजरंग बाण का पाठ करने से उसे राहत मिलती है।
नियमित रूप से: यदि आप नियमित रूप से बजरंग बाण का पाठ करना चाहते हैं, तो सुबह या शाम का समय उपयुक्त होता है।
विशेष अनुष्ठान: किसी विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए या किसी विशेष अवसर पर भी बजरंग बाण का पाठ किया जा सकता है।
क्या बजरंग बाण रोज नहीं पढ़ना चाहिए? (Should Bajrang Baan not be recited daily?)
ऐसा कोई नियम नहीं है कि बजरंग बाण को रोज नहीं पढ़ना चाहिए। यदि आप चाहें तो इसे रोज भी पढ़ सकते हैं। लेकिन, कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
नियमितता: यदि आप इसे रोज पढ़ते हैं, तो इसे नियमित रूप से करें, बिना किसी व्यवधान के।
शुद्धता और एकाग्रता: पाठ करते समय शुद्धता और एकाग्रता का ध्यान रखें।
मन की स्थिति: यदि आपका मन अशांत है या आप किसी नकारात्मक विचार से ग्रस्त हैं, तो उस समय पाठ न करें।
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण में क्या अंतर है? (What is the difference between Hanuman Chalisa and Bajrang Baan?)
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण दोनों ही हनुमान जी को समर्पित स्तोत्र हैं, लेकिन उनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:
प्रकृति (Nature): हनुमान चालीसा एक स्तुति है जिसमें हनुमान जी के गुणों, कार्यों और राम भक्ति का वर्णन है। यह शांत और भक्तिमय है। वहीं, बजरंग बाण एक ‘बाण’ की तरह है, जो शत्रुओं और बाधाओं पर प्रहार करता है। यह अधिक शक्तिशाली और तेज है।
उद्देश्य (Purpose): हनुमान चालीसा का पाठ मुख्य रूप से हनुमान जी की भक्ति और कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। बजरंग बाण का पाठ मुख्य रूप से संकटों से मुक्ति, सुरक्षा और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है।
भाषा (Language): हनुमान चालीसा अवधी भाषा में लिखी गई है, जबकि बजरंग बाण की भाषा थोड़ी अधिक तत्सम है।
पाठ का समय (Time of recitation): हनुमान चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, जबकि बजरंग बाण के पाठ के लिए कुछ विशेष समय और नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।
संक्षेप में, हनुमान चालीसा भक्ति और स्तुति का मार्ग है, जबकि बजरंग बाण शक्ति और सुरक्षा का मार्ग है। दोनों ही अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के उत्तम साधन हैं।
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बजरंग बाण हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। इसका नियमित और विधिपूर्वक पाठ करने से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इस स्तोत्र का प्रयोग हमेशा अच्छे कार्यों के लिए ही करना चाहिए।
यह लेख बजरंग बाण के बारे में एक विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। यदि आप इस विषय में और अधिक जानना चाहते हैं, तो आप किसी विद्वान या धार्मिक ग्रंथ से सलाह ले सकते हैं।
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BAJRANG BAAN PDF downloadबजरंग बाण
॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान ॥
॥ चौपाई ॥
जय हनुमंत संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥०१॥
जन के काज विलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥०२॥
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा ।
सुरसा बद पैठि विस्तारा ॥०३॥
आगे जाई लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ॥०४॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम पद लीन्हा ॥०५॥
बाग उजारी सिंधु महं बोरा ।
अति आतुर यम कातर तोरा ॥०६॥
अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेट लंक को जारा ॥०७॥
लाह समान लंक जरि गई ।
जय जय धुनि सुर पुर महं भई ॥०८॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥०९॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता ।
आतुर होय दुख हरहु निपाता ॥१०॥
जै गिरिधर जै जै सुखसागर ।
सुर समूह समरथ भटनागर ॥११॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।
बैरिहिं मारू बज्र की कीले ॥१२॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो ।
महाराज प्रभु दास उबारो ॥१३॥
ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ॥१४॥
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥१५॥
सत्य होहु हरि शपथ पाय के ।
रामदूत धरु मारु धाय के ॥१६॥
जय जय जय हनुमंत अगाधा ।
दु:ख पावत जन केहि अपराधा ॥१७॥
पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ॥१८॥
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥१९॥
पांय परों कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥२०॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥२१॥
बदन कराल काल कुल घालक ।
राम सहाय सदा प्रति पालक ॥२२॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर ।
अग्नि बेताल काल मारी मर ॥२३॥
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की ।
राखु नाथ मरजाद नाम की ॥२४॥
जनकसुता हरि दास कहावौ ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावो ॥२५॥
जय जय जय धुनि होत अकाशा ।
सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ॥२६॥
चरण शरण कर जोरि मनावौ ।
यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ॥२७॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई ।
पांय परौं कर जोरि मनाई ॥२८॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता ।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥२९॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल ।
ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥३०॥
अपने जन को तुरत उबारो ।
सुमिरत होय आनन्द हमारो ॥३१॥
यह बजरंग बाण जेहि मारै ।
ताहि कहो फिर कौन उबारै ॥३२॥
पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करैं प्राण की ॥३३॥
यह बजरंग बाण जो जापै ।
तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे ॥३४॥
धूप देय अरु जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥३५॥
॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ॥